SURTA ]- छत्तीसगढ़ी भाषा अउ छत्तीसगढ़ के धरोहर ल समर्पित

रमेशकुमार सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ी काव्यांजली:- सुरता rkdevendra.blogspot.com

सास बहू के झगरा

आँखी तोरे फूट गे, दिखत नई हे काम ।
गोबर-कचरा छोड़ के, करत हवस आराम ।।
करत हवस आ-राम दोखई, बइठे-बइठे ।
सुनत सास के, गारी-गल्ला, बहू ह अइठे ।।
नई करँव जा, का करबे कर, मरजी मोरे ।
बइठे रहिहँव, चाहे फूटय, आँखी तोरे ।।


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ताते-तात

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अउ का-का हे इहाँ-