SURTA ]- छत्तीसगढ़ी भाषा अउ छत्तीसगढ़ के धरोहर ल समर्पित

रमेशकुमार सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ी काव्यांजली:- सुरता rkdevendra.blogspot.com

हे गणपति गणराज प्रभु

हे गणपति गणराज प्रभु, हे गजबदन गणेश,
श्रद्धा अउ विश्वास के, लाये भेंट ‘रमेश‘ ।।
लाये भेंट ‘रमेश‘, पहिलि तोला परघावत ।
पाँव गिरे मुड-गोड़, अपन दुख दरद सुनावत ।
दुख मा फँसे ‘रमेश’, विनति सुनलव हे जगपति ।
विघ्न विनाशक आच, विघ्न मेटव हे गणपति ।।
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ताते-तात

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डमरू घनाक्षरी (32 वर्ण लघु) सुनत-गुनत चुप, सहत-रहत गुप दुख मन न छुवत, दुखित रहय तन । बम-बम हर-हर, शिव चरण गहत, शिव-शिव शिव अस, जग दुख भर मन ...

अउ का-का हे इहाँ-