हे भारत महतारी
परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा, हे भारत महतारी ।
तोरे महिमा कइसे गावव, दुनिया मा ये भारी ।।
परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा, हे भारत महतारी ।
तोरे महिमा कइसे गावव, दुनिया मा ये भारी ।।
हे भारत महतारी हे भारत महतारी हे भारत महतारी
लहर-लहर नदियां लहरावय, सरर-सरर पुरवाही।
रुख -राई गमगम ले गमके, फर धर हाही-माही।।
खेतखार अउ अरिया-परिया, हरियर-हरियर छाये।
जंगल-झाड़ी सागर परवत, सबके मन ला भाये ।।
लइका मन के पेट भरे बर, धरे परोसा थारी।
परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा, हे भारत महतारी ।
हे भारत महतारी हे भारत महतारी हे भारत महतारी
गुरतुर-गुरतुर भाखा बोली, गुरतुर हॅंसी ठिठोली।
लुकलुक ले चंदा चंदैनी, सूरत सुग्घर भोली ।।
तोरे लइका जयकार करत, सुर म सुर मिलाये।
महतारी के रक्षा खातिर, मुड़ मां कफ़न बंधाये ।।
हम तो बारा घला बजाबो, नो हय झूठ लबारी ।
परणाम हवय गाड़ा-गाड़ा, हे भारत महतारी ।
हे भारत महतारी हे भारत महतारी हे भारत महतारी
-रमेश चौहान
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