बादर करिया छाय, कुलुप लागे घर कुरिया ।
कब तक रहि धंधाय, खड़े आतंकी ओ करिया ।।
केवल छाती तान, शहिद सैनिक मन होये ।
हम मारे हन चार, बीस सैनिक ला खोये ।।
कहय शहिद के बेटवा, बैरी के अब घर घुसर ।
बिला म घुसरे साप के, मुड ला पथरा मा कुचर ।।
कब तक रहि धंधाय, खड़े आतंकी ओ करिया ।।
केवल छाती तान, शहिद सैनिक मन होये ।
हम मारे हन चार, बीस सैनिक ला खोये ।।
कहय शहिद के बेटवा, बैरी के अब घर घुसर ।
बिला म घुसरे साप के, मुड ला पथरा मा कुचर ।।
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