मनमोहन छंद मनखे के हे, एक धरम । मनखे बर सब, करय करम मनखे के पहिचान बनय । मनखेपन बर, सबो तनय दूसर के दुख दरद हरय । ओखर मुड़ मा, सुख ल भरय सुख के रद्दा, अपन गढ़य । भव सागर ला पार करय मनखे तन हे, बड़ दुरलभ । मनखे मनखे गोठ धरब करम सार हे, नषवर जग । मनखे, मनखे ला झन ठग जेन ह जइसन, करम करय । तइसन ओखर, भाग भरय सुख के बीजा म सुख फरय । दुख के बीजा ह दुख भरय मनखे तन ला राम धरय । मनखे मन बर, चरित करय सब रिश्ता के काम करय । दूसर के सब, पीर हरय -रमेश चौहान
व्यंग्य: दिल का इलाज, रामबाण उपाय-डॉ.विनोद नायक
-
https://open.spotify.com/episode/5PodqDQQCfpQrLq4xHU1KE?si=t7EWGWe6T9CXT0YCoUjkEQ
गजबी लाल ने हॉस्पिटल में प्रवेश किया और जोर जोर से चिल्लाने लगा डॉक्टर साह...
17 घंटे पहले