नवा सोच के नवा साल के बधाई
(दुर्मिल सवैया)
मनखे मनखे मन खोजत हे, दिन रात खुशी अपने मन के ।
कुछु कारण आवय तो अइसे, दुख मेटय जेन ह ये तन के ।
सब झंझट छोड़ मनावव गा, मिलके कुछु कांहि तिहार नवा ।
मन मा भर के सुख के सपना, सब कोइ मनावव साल नवा ।।
-रमेश चौहान
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