गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016

छांट छांट बैरी ला मारव,


चारों कोती देखव संगी, कइसन कुहरा छाये ।
आतंक मचावत बैरी मन, बारूद बम्म जलाये ।।

जे एन यू मा जुरे कइसे, पाकिस्तानी पीला ।
दिल्ली प्रेस क्लब म बैरी मन, करे कोन ओ लीला ।।

हीरो करे देशद्रोही ला, बैरी मन मतियाये ।
हमरे छाती बइठे बैरी, हमला बड़ जिबराये ।।

जेने थारी खाये बैरी, छेदा ओमा बनाये ।
कोन बने बैरी के संगी, कोन इहां रतियाये  ।।

कइसन बोले के आजादी, कोन समझ हे पाये ।
गारी गल्ला हमला देवय, सुन लव घेच नवाये ।।


सरकार खोरवा लुलवा हे, कनवा भैरा नेता ।
कोंदा बन मानवाधिकारी, लागत हे अभिनेता ।।

वोट बैंक के लालच बोये, जाति धरम गिनवाये ।
नकटा कुटहा लोभी मन हा, देश बेच के खाये ।।

अपन वोट ला तैं हर कइसे, बेचे हस हटवारा ।
अपने आंखी खोल निटोरव, जागव झारा झारा ।।

सुरूज होय के कुहरा मेटव, जउन देश मा छाये ।
छांट छांट बैरी ला मारव, जे दुश्मन उपजाये ।।