शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

जय जय किसान

छबि छंद 8 मात्रा पदांत 121

धरती हमार । तैं हर सवार
हमरे मितान । आवस किसान

कर ले न चेत । जाके ग खेत
जांगर ल टोर । माटी म बोर

ओ खेत खार । धनहा कछार
बसथे ग जान । बाते ल मान

नांगर ल जोत । तन मन ल धोत
अर अर तता त । अर  अर तता त

उबजहि ग धान । सीना ल तान
घात लहरात । घात ममहात

पीरा ल मेट । भरही ग पेट
जांगर तुहार । जीवन हमार

गाबो ग गीत । तैं हमर मीत
जय जय किसान । तैं ह भगवान