काटा म जब काटा चुभाबे, तभे निकलथे काटा पांव । कटे ल अऊ काटे ल परथे, त जल्दी भरते कटे घांव ।। लोहा ह लोहा ला काटथे, तब बनथे लोहा औजार । दुख दुख ला काटही मनखे, ऐखर बर तै रह तइयार ।। जहर काटे बर दे ल परथे, अऊ जहर के थोकिन डोज । गम भुलाय ल पिये ल परथे, गम के पियाला रोज रोज ।। प्रसव पिरा ला जेन ह सहिथे, तीनो लोक ल जाथे जीत । धरती स्वर्ग ले बड़े बनके, बन जाथे महतारी मीत ।। दरद मा दरद नई होय रे, दरद के होथे अपन भाव । दरद सहे म एक मजा होथे, जब दरद म घला होय चाव ।।
गीत : आज बंधे दो मन एक डोर में
-
*मुखड़ा (युगल)*
आज बंधे दो मन एक डोर में
सपनों की उजली भोर में
तुम हाथ पकड़ कर साथ चलो
मैं छाया बन जाऊँ हर मोड़ में
आज बंधे दो मन एक डोर में
*अंतरा 1 (स...
1 घंटे पहले