मोर छत्तीसगढ़ मा, साल भर तिहार हे मोर छत्तीसगढ़ मा, तो साल भर तिहार हे लगे जइसे दाई हा, करे गा सिंगार हे। हम आषाढ महिना, रथयात्रा मनाथन घर घर कथा पूजा, देव ला जोहार हे ।। पधारे जगन्नाथ हा, सजे सुघ्घर रथ मा गांव गांव गली गली, करे विहार हे । भोले बाबा सहूंहे हे, सावन महिना भर करलव गा उपास, सावन सोम्मार हे ।। येही मा हरेली आथे, किसान हा हरसाथे लइका खापे गा गेड़ी, मजा भरमार हे । भाई बहिनी के मया, सावन हा सजोवय बहिनी बांधय राखी, देत दुलार हे ।। भादो मा खमरछठ, पसहर के चाऊर खाके रहय उपास, दाई हमार हे । आठे कन्हैया मनाय, जनमदिन कृष्णा के दही लूट के गांव मा, बड़ खुमार हे ।। दाई माई बहिनी के, आगे अब तिजा पोरा जोहत लेनहार ला, करे वो सिंगार हे । लइकापन के जम्मो, संगी सहेली ह मिले पटके जब तो पोरा, परत गोहार हे । घर घर करू भात, जा जा मया मा तो खाथें आज तिजा के उपास, काली फरहार हे । ठेठरी खुरमी फरा, आनी बानी के कलेवा नवा नवा लुगरा ले, नोनी गुलजार हे । तिजा-पोरा मइके के, सुध बढ़ावव भादो ठेठरी-खुरमी पागे, मइके दुलार हे । आगे भादो के महिना, गणराजा हा पधारे गणेश भक्ति मा...