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कतका झन देखे हें-

पांव पखारे शिष्य के

पांव पखारे शिष्य के, गुरू मन हर आज ।
चेला जब भगवान हे, गुुरू के का काज ।।
गुुरू के का काज, स्कूल हा होटल होगे ।
रांध खवा के भात, जिहां गुरूजी हा सोगे ।।
कागज मा सब खेल, देख तै मन ला मारे ।
लइका होगे पास, चलव गा पांव पखारे ।।

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