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जइसे बोबे बीजहा, तइसे पाबे बीज ।
बर्रे काटा बोय के, चाउर खोजेे खीझ ।
चाउर खोजे खीझ, धान तै हर बिन बोये ।
काम बनाथे भाग , समझलव जी हर कोये ।।
कह ‘रमेश‘ कवि राय, बुता करलव जी अइसे ।
करलव जी साकार, तोर सपना हे जइसे ।।
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