सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कतका झन देखे हें-

जइसे बोबे बीजहा

जइसे बोबे बीजहा, तइसे पाबे बीज ।
बर्रे काटा बोय के, चाउर खोजेे खीझ ।
चाउर खोजे खीझ, धान तै हर बिन बोये ।
काम बनाथे भाग , समझलव जी हर कोये ।।
कह ‘रमेश‘ कवि राय, बुता करलव जी अइसे ।
करलव जी साकार, तोर सपना हे जइसे ।।

टिप्पणियाँ

मोर दूसर ब्लॉग