दुवारी मा चौरा, चौरा म घर चातर होगे साकुर, अब धंधा के मर । मोरे गाँव मा मोरे गाँव मा, देखय कोन गाँव ला । मोरे गाँव मा गली ला छेके, मन भर के लइका खेले नई सकयं, अब बने तन के । मोरे गाँव मा मोरे गाँव मा, देखय कोन गाँव ला । मोरे गाँव मा खेत तीर परिया, परिया तीर खेत खेत खेते हवय, परिया ला तो देख । मोरे गाँव मा मोरे गाँव मा, देखय कोन गाँव ला । मोरे गाँव मा नदिया के पीरा, सुनय अब कोन नदिया के पैरी, काबर होगे मोन । मोरे गाँव मा मोरे गाँव मा, देखय कोन गाँव ला । मोरे गाँव मा बस्ती मा तरिया, तरिया मा बस्ती लइका तउरय कहाँ, अब अपने मस्ती । मोरे गाँव मा मोरे गाँव मा, देखय कोन गाँव ला । मोरे गाँव मा गाय बर चरिया, चरिया बर गाय कोठा होगे सुन्ना, बछरू नई नरियाय । मोरे गाँव मा मोरे गाँव मा, देखय कोन गाँव ला । मोरे गाँव मा -रमेश चौहान
कहिनी:पानी हे अमोल -डोरेलाल कैवर्त
-
“‘ बिन पानी नि हे जिनगानी* ” ए कहना सोलाआना सिरतोन आय । पानी के बिना जिनगी
जिए के कल्पना घलो नि करे जा सके ? हमन सबो जानत हांवन…
3 हफ़्ते पहले