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संदेश

कतका झन देखे हें-

ये गोरी मोर

ऐ गोरी मोर, पैरी तोर, रून छुन बाजे ना । सुन मयारू बोल, ढेना खोल, मनुवा नाचे ना । कजरारी नैन, गुरतुर बैन, जादू चलाय ना । चंदा बरन रूप, देखत हव चुप, दिल मा बसाय ना । गोरी तोर प्यार, मोर अधार, जिनगी ल जिये बर । ये जिनगी तोर, गोरी मोर, मया मा मरे बर । कइसन सताबे, कभू आबे, जिनगी गढ़े बर । करव इंतजार, सुन गोहार, तोही ल वरे बर । .............रमेश ......................

ददरिया

अमुवा के डार, बांधे हवंव झूलना । चल संगी झुलबो, बांह जोरे ना ।। चल संगी झूलबो मोर आंखी म तै, तोर आंखी म मै । आंखी म आंखी, मिलाबो हमन ना ।। चल संगी झूलबो मोंगरा के फूल, सजाहंव बेनी तोर । तोर रूप मनोहर, बसाहंव दिल मा ना ।। चल संगी झूलबो मया के चिन्हा, अंगरी म मुंदरी आजाबे रे संगी, पहिराहंव तोला ना ।। चल संगी झूलबो तै मोर राधा गोई, मै किसन बिलवा मया के बसुरी, बजा हू मै ह ना । चल संगी झूलबो मै तोर लोरिक गोई, तै मोर बर चंदा । जान के बाजी, मै हर लगा दूहू ना ।। चल संगी झूलबो आनी बानी के सपना, संजोहव आंखी म । बिहा के तोला, ले जाहू अपन अंगना । चल संगी झूलबो .............................. .......................... - रमेशकुमार चौहान नवागढ जिला बेमेतरा

छत्तीसगढ़ महतारी

हे दाई छत्तीसगढ़, हाथ जोड़ परनाम। घात मयारू तैं हवस, दया मया के धाम । दया मया के धाम, सांति सुख तै बगरावत । धन धन हमर भाग, जिहां तो हम इतरावत ।। धुर्रा माटी तोर, सरग ले आगर भाई। होवय मउत हमार, तोर कोरा हे दाई ।।1।। महतारी छत्तीसगढ़, करत हंव गुनगान । अइसन तोरे रूप हे,  कइसे होय बखान ।। कइसे होय बखान, मउर सतपुड़ा ह छाजे । कनिहा करधन लोर, मकल डोंगरी बिराजे ।। पैरी साटी गोड, दण्ड़कारण छनकारी । कतका सुघ्घर देख, हवय हमरे महतारी ।।2।। महतारी छत्तीसगढ़, का जस गावन तोर । महानदी शिवनाथ के, सुघ्घर कलकल शोर ।। सुघ्घर कलकल शोर, इंदरावती सुनावय । पैरी खारून जोंक, संग मा राग मिलावय ।। अरपा सोंढुर हाॅफ, हवय सुघ्घर मनिहारी । नदिया नरवा घात, धरे कोरा महतारी ।।3।। महतारी छत्तीसगढ़, सुघ्घर पावन धाम । धाम राजीम हे बसे, उत्ती मा अभिराम ।। उत्ती मा अभिराम, हवय बुड़ती बम्लाई । अम्बे हे भंडार, अम्बिकापुर के दाई । दंतेसवरी मोर, सोर जेखर बड़ भारी। देत असिस रक्सेल, सबो ला ये महतारी ।।4।। महतारी छत्तीसगढ़, तोर कोरा म संत । कतका देव देवालय, कतका साधु महंत ।। कतका साधु महंत, बसय दा

काटा म जब काटा चुभाबे

काटा म जब काटा चुभाबे, तभे निकलथे काटा पांव । कटे ल अऊ काटे ल परथे, त जल्दी भरते कटे घांव ।। लोहा ह लोहा ला काटथे, तब बनथे लोहा औजार । दुख दुख ला काटही मनखे, ऐखर बर तै रह तइयार ।। जहर काटे बर दे ल परथे, अऊ जहर के थोकिन डोज । गम भुलाय ल पिये ल परथे, गम के पियाला रोज रोज ।। प्रसव पिरा ला जेन ह सहिथे, तीनो लोक ल जाथे जीत । धरती स्वर्ग ले बड़े बनके, बन जाथे महतारी मीत ।। दरद मा दरद नई होय रे, दरद के होथे अपन भाव । दरद सहे म एक मजा होथे, जब दरद म घला होय चाव ।।

काबर करय दुख

मनखे काबर करय दुख, भूला के बिसवास। दुख के भीतर हवय सुख, इही जगत के आस ।। इही जगत के आस, रिकोथे तेन समोथे । हमर कहां अवकात, सबो ओही पुरोथे ।। घट घट जेखर वास, कोन ओला परखे । छोड़ संसो चिंता, करम भर कर मनखे।। ...........‘रमेश‘.................

हे जिबरावत गोरी

काजर आंजत मुंह सजावत देख लजावत दर्पण छोरी । केस सजावत फूल लगावत खुद ल देखत भावत छोरी । आवत जावत रेंगत कूदत नाचत गावत देखत गोरी । काबर मुंह बनावत मुंह लुकावत हे जिबरावत गोरी । ......................रमेश.....................

चार दिन के सगा घरोधिया होगे

चार दिन के सगा घरोधिया होगे । मोर घर के मन ह, परबुधिया होगे ।।1।। का जादू करंजस, अइसन होईस रे अपन समझेव, तेन बहुरूपिया होगे ।।2।। कोनो ल सुहावत नईये मोरो भाखा कइसन मोर लईका मन शहरिया होगे ।।3।। घात फबयत रहिस भाखा के लुगरा का करबे ओही लुगरा फरिया होगे ।।4।। मोर बडका बड़का रहिस महल अटारी, आज कइसन सकला के कुरिया होगे ।।5।। जेन लईका ल पढायेंव तेने कहा अड़हा लाज म मोर मुंह करिया करिया होगे ।।6।। अपन घर ल पहिचान बाबू सपना ले जाग देख निटोर के अब तो बिहनिया हो

मोर मयारू गणेश

मोर मयारू गणेश दोहा सबले पहिले होय ना, गणपति पूजा तोर । पाँव परत हंँव तोर गा, विनती सुन ले मोर ।। तोर शरण मा आया जे, ले श्रद्धा विश्वास । पूरा कर देथस सबो, उनखर जम्मो आस ।। चौपाई हे गौरा गौरी के लाला । हे प्रभु  तैं हस दीन  दयाला सबले पहिली तोला सुमरन । तोरे गुण ला गा के  झुमरन बुद्धि तहीं हा सब ला देथस। दुख पीरा ला हर लेथस तोरे जस ला वेदे गावय । भारी महिमा तोर बतावय पहिली चक्कर तैं हा काटे ।  अपन ददा दाई के बांटे तोर काम ले गदगद भोला । बना दिइस गा गणेश तोला तोर नाम ले मुहरूत करथन । जीत खुशी ला ओली भरथन काम-बुता सब सुग्घर होथे । हमरे बाधा मुँड़ धर रोथे जइसन लम्बा सूड़े तोरे । लम्बा कर दव चिंतन मोरे जइसन भारी पेटे तोरे । भारी कर दव विचार मोरे भाथे गौरी दुलार  तोला । ओइसने दव दुलार मोला गुरूतुर मोदक भाये तोला । मीठ मीठ भाखा दे दव मोला हे लंबोदर किरपा करदव । गलत सोच ला झट्टे हरदव मनखे ला मनखे हम मानी । जगत जीव ला एके जानी हे आखर के मोर देवता । मानव-मानव मोर नेवता नाश करव प्रभु मोर कुमति के । अन्न-धन्न दौ देव सुमति के अपने पुरखा अउ माटी के । अपने जंगल अउ

छत्तीसगढ़ी दोहा

छत्तीसगढ़ी दोहा    हर भाखा के कुछु न कुछु, सस्ता महंगा दाम ।    अपन दाम अतका रखव, आवय सबके काम ।।    दुखवा के जर मोह हे , माया थांघा जान ।    दुनिया माया मोह के, फांदा कस तै मान।।    ये जिनगी कइसे बनय, ये कहूं बिखर जाय ।    मन आसा विस्वास तो, बिगड़े काम बनाय ।। -रमेश चौहान .

हे गौरी के लाल

बुद्धि के देवइया अऊ पिरा के हरइया हे गज मुख  वाला । सबले पहिली तोला सुमिरव हे षंकर सुत गौरी के लाला ।। वेद पुरान जम्मो तोरे च गुन ल गाय हे, सबले पहिली श्रीगणेष कहव बताय हे । सभो देवता ले पहिली सुमिरन तोरे कहाये हे, हे परभू मोरो अंतस ह तोरे च गुन ल गाये हे । शुरू करत हव तोर नाम ले, ये कारज गृह जंजाला, हे गजानन दया करहू झन होवय कुछु गड़बड़ झाला । हे गौरी के लाला......... जइसे लंबा लंबा सूड़ तोरे, लंबा कर दव सोच ल मोरे । जइसन भारी पेट तोरे, गहरा बना दव विचार ल मोरे । अपन माटी अऊ अपन पुरखा के सेवा गावंव ले सुर लय ताल । हे एकदन्त एक्केच किरपा करहू बुद्धि ले झन रहव मै कंगाल ।। हे गौरी के लाल..... जइसे भाते उमा महेश के मया ह तोला, ओइसने अपन मया दे दव मोला । मिठ मिठ लाडू जइसे भाते तोला, ओइसने गुतुर गुतुर भाखा दे दव मोला । कुमति के नाश कर सुमति ले भर दौव मोरो भाल । हे आखर के देवता मोरो गीत ल लौव सम्हाल ।। हे गौरी के लाल............ दाई ल धरती ददा ल अकास कहिके कहाय गणेश, तोर ये बुद्धि ल जम्मो देवता ले बड़का कहे हे महेश । तोरे च शरण आये नारद अऊ सब देवता संग सुरेश

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