शनिवार, 18 अप्रैल 2015

हे हनुमान प्रभु

ले सुध हे हनुमान प्रभु, राम दूत बजरंग ।
मूरत सीताराम के, रखथस अपने संग ।
रखथस अपने संग, चीर छाती तै देखाये ।
ओखर तै रखवार, जगत ला खुदे बताये ।
बिपत हरइया नाथ, बिपत मोरो हर दे ।
पखारंव प्रभु पांव, दास अपने तै कर ले ।।