सोमवार, 27 अप्रैल 2015

देख बड़ोरा काल के

देख बड़ोरा काल के, हरागे मोर चेत ।
परवा कठवा उड़ा गे, काड़ पटिया समेत ।।
काड़ पटिया समेत, गाय कोठा के मोरे ।
हम देखत रहिगेंन, करेजा मुॅह मा बोरे ।।
धन्न भाग भगवान, हमन बाचगेंन कोरा ।
कहत रहिगेंन राम, काल के देख बड़ोरा ।।

डहे रहिन हे बेंदरा, तेला हमन सहेंन ।
खपरा उतार छानही, टिन ल ठोकें रहेंन ।।
टिन ल ठोकें रहेंन, उधारी मा ले ले के ।
अभी रहिस छूटाय, उधारी हा ले दे के ।।
होनी हे बलवान, हमर तो कुछु न लहे ।
काबर तै भगवान, हमन ला काहेक डहे ।।