मंगलवार, 16 जून 2015

आज बचपना बचा दव

  • पढ़ा लिखा लव ज्ञान बर, देवव जी संस्कार ।
  • नान्हे लइका ला अपन, पढ़ई मा झन मार ।।
  • पढ़ई मा झन मार, लदक के बोझा मुड़ मा ।
  • लइकापन छोड़ाय, जहर देवव मत गुड़ मा ।।
  • कह ‘रमेश‘ कविराय, आज बचपना बचा दव ।
  • छोड़व मार्डन सोच, ज्ञान बर पढ़ा लिखा लव ।।