शनिवार, 6 जून 2015

आत हे मानसून

झमा-झमा पानी गिरे, आत हे मानसून ।
जूड़ावत छाती हमर, मन गाये गुनगून ।।
मन गाये गुनगून, देख के बदरी कारी ।
फुदक-फुदक हरसाय, चिरइ चिरगुन मतवारी ।।
पुरवाही ह सुहाय, आय अब रूख म जवानी ।
लइका नाचय देख, गिरत झमा-झमा पानी ।।