बुधवार, 21 सितंबर 2016

//भ्रष्टाचार// (नवगीत)

घुना किरा
जइसे कठवा के
भ्रष्टाचार धसे हे

लालच हा अजगर असन
मनखे मन ला लिलत हे
ठाठ-बाट के लत लगे
दारू-मंद कस पियत हे

पइसा पइसा
मनखे चिहरय
जइसे भूत कसे हे

दफ्तर दफ्तर काम बर
टेक्स लगे हे एक ठन
खास आम के ये चलन
बुरा लगय ना एक कन

हमर देश के
ताना बाना हा
 अपने जाल फसे हे

रक्तबीज राक्षस असन
सिरजाथे रक्सा नवा
चारो कोती हे लमे
जइसे बगरे हे हवा

अपन हाथ मा
खप्पर धर के
अबतक कोन धसे हे ।