मंगलवार, 18 अक्तूबर 2016

नारी नर ले भारी

छन्न पकइया छन्न पकइया, नारी नर ले भारी ।
जेन काम मा देखव संगी, लगे हवय गा नारी ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, नारी नो हय अबला ।
देखाये हे अपने ताकत, नारी मन हा सब ला ।

छन्न पकइया छन्न पकइया, सेना मा हे नारी ।
बैरी मन के छाती फाड़े, मारत हे किलकारी ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, हवे कलेक्टर नारी ।
मास्टर डाँक्टर इंजिनियर अउ, हवे पुलिस पटवारी ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, नारी के का कहना ।
हावे नेता अउ अधिकारी, अम्मा दीदी बहना ।

छन्न पकइया छन्न पकइया, नारी बने व्यपारी ।
हर काउन्टर मा नोनी मन, गोठ करे हे भारी ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, लगे अचंभा भारी ।
घर के अपने बुता बिसारे, पढ़े-लिखे कुछ नारी ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, वाह रे मोटियारी ।
बना नई सके चाय कप भर, करे हे होशियारी ।

छन्न पकइया छन्न पकइया, अब के आन भरोसा ।
दाई पालनहारी रहिस ग, परसे कई परोसा ।।

छन्न पकइया छन्न पकइया, मनखे चिरई होगे ।
धरती के कुरिया ला छोड़े, गगन म जाके सोगे ।।