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कतका झन देखे हें-

काबर करे अराम

आधा करके काम ला, काबर करे अराम ।
आज काल के फेर मा, कतका बाचे काम ।।
कतका बाचे काम, देख के चिंता होही ।
करहि जेन हा ढेर, बाद मा  बहुते रोही ।।
मन के जीते जीत, हार मन के हे व्याधा।
चिंता मा तन तोर, होय सूखा के आधा।।

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