अरे दुख पीरा, तैं मोला का डेरूहाबे मैं पर्वत के पथरा जइसे, ठाढ़े रहिहूँव । हाले-डोले बिना, एक जगह माढ़े रहिहूँव जब तैं चारो कोती ले बडोरा बनके आबे अरे दुख पीरा, तैं मोला का ...
हास्य नज़्म-प्रो.रवीन्द्र प्रताप सिंंह
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उस्तरा ले के बुलाता है हज्जाम,चले आओलेना है इन जुल्फों से इंतकाम चले आओ ।
रंग ओ रोगन से छुपाई है जो सफेदी इनकीदेखो उसका क्या होगा अंजाम, चले आओ ।
कैंचियां ...
1 हफ़्ते पहले