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कतका झन देखे हें-

गलती ले बड़का सजा

लगे काम के छूटना, जीयत-जागत मौत ।
गलती ले बड़का सजा, भाग करम के सौत ।।
भाग करम के सौत, उठा पटकी खेलत हे ।
काला देवय दोष, अपने अपन  झेलत हे ।।
‘रमेश‘ बर कानून, न्याय बस हवय नाम के ।
चिंता करथे कोन, कोखरो लगे काम के ।।

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