अव्यवस्था के खिलाफ बियंग भरे सरसी छंद चित्र गुगल से साभार दू पइसा मा मँहगा होगे, गउ माता हा आज रे । कुकरी-कुकरा संग बोकरा, करत हवय अब राज रे। बइला के पूछारी नइ हे, भइसा ला झन पूछ रे । आनी बानी के मषीन मा, अब देखावय सूझ रे ।। सरकारी जमीन खाली हे, जाके ओला छेक रे । आज नहीं ता काली तोला, पट्टा मिलही नेक रे ।। कोला-बारी खेत बना ले, नदिया नरवा पाट रे। घर कुरिया अउ महल बना ले, छेकत रद्दा बाट रे।। सरकार नगत के डर्राथे, तोर हाथ मा वोट रे । मन भर ऊदा-बादी करले, कोने देही चोट रे ।। मनभर करजा कर ले तैं हा, होबे करही छूट रे । नेता भर मन काबर खावय, तहूँ ह मिलके लूट रे ।। बने मजा हे गरीबहा के, बन के तहूँ ह देख रे । आनी-बानी हवय फायदा, नेतागिरी सरेख रे ।। आँखी रहिके बन ज अंध...
छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह आपरेशन एक्के घॉंव भाग-2
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छ्त्तीसगढ़िया के धियान रखैया छत्तीसगढ़िया के धियान रखैया, किसान राज चलैया।
मोर छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता के,नवा सुरुज उगैया।। हमर बर तो एकर पहिली,
रिहिस रा...
2 हफ़्ते पहले