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कतका झन देखे हें-

पइसा

पइसा ले नाता हवय, हवय संगी मितान।
पइसा बीना हे कहां, तोर कदर इंसान ।।
तोर कदर इंसान, कमावत ले तो होही  ।
जांगर थिराय कोन, कहय रे तोला जोही ।।
जीयत भर तै पोस, कमा ले गा जस भइसा ।
बीबी बच्चा तोर, रात दिन मांगे पइसा ।
- रमेशकुमार सिंह चौहान

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