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कतका झन देखे हें-

दोहावली

गली गली छेकाय अब, रद्दा रेंगव देख ।
चाकर दिखय गली कहू, ओला तैले छेक ।।

बनवा लव चैरा बने, बाजू पथरा गाड़ ।
अऊ पानी निकल दव, गली म जावय माड़ ।।

रद्दा छेके तै बने,  दूसर बर चिल्लाय ।
अपन आघू म शेर तै, पाछू म मिमीआय ।।

गली अब कोलकी बने, बने न आवत जात ।
मतलब कोनो ला कहां, मतलबीया जमात ।।

छोकरी दिखय छोकरा,  जिंस पेंट फटकाय ।
कनिहा ले बेनी कहां, चुन्दी ले कटवाय ।।

छोकरा दिखय छोकरी, लंबा चुन्दी भाय ।
चिक्कन चांदर गाल हे, मेछा हे मुड़वाय ।।

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