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कतका झन देखे हें-

बाढ़े बहुते जाड़

कथरी कमरा ओढ ले, सेखी मत तो झाड़ ।
हाथ गोड़ कापत हवे, बाढ़े बहुते जाड़ ।।
बाढ़े बहुते जाड़, पूस के सीत लहर मा ।
हू हू मनखे करय, रगड़ के हाथ कहर मा ।।
नोनी बिना नहाय, दिखत हे कइसन झिथरी ।
बइठे आगी तीर, बबा ओढ़े हे कथरी ।

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