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कतका झन देखे हें-

रखे कहां कुछु देह के

रखे कहां कुछु देह के, कब काहीं हो जाय ।
ना जाने कब देह मा, रोग राई समाय ।
रोग राई समाय, नाम कोनो रखाय के ।।
सड़क म कतका भीड़, रखे कबतक बचाय के ।।
कोनो देही ठोक, मंदहा मन तो घात दिखे ।
बचे भला रे कोन, जीव अपने देह रखे ।।

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