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कतका झन देखे हें-

मया ले सनाय दिल गा

मिरगा कस खोजत हवस, गांव गली अउ खोर ।
कसतूरी कस हे मया, समाय भीतर तोर ।।
समाय भीतर तोर, मया ला पाके उपजे ।
रगड़ होय जब बांस, बास मा आगी सिरजे ।।
महर महर ममहाय, मया ले सनाय दिल गा ।
खूब कूदत नाचत, पाय ओ मयारू मिरगा ।।

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