SURTA ]- छत्तीसगढ़ी भाषा अउ छत्तीसगढ़ के धरोहर ल समर्पित

रमेशकुमार सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ी काव्यांजली:- सुरता rkdevendra.blogspot.com

जनउला हे अबूझ



का करि का हम ना करी, जनउला हे अबूझ ।
बात बिसार तइहा के, देखाना हे सूझ ।।
देखाना हे सूझ, कहे गा हमरे मुन्ना हा ।
हवे अंधविश्वास, सोच तुहरे जुन्ना हा ।।
नवा जमाना देख, कहूं तकलीफ हवय का ।
मनखे मनखे एक, भेद थोरको हवय का ।।
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