सोमवार, 30 नवंबर 2015

अपन भाखा

बासी मा मही ला घोर के तो देख ।
रोटी ला दूध मा बोर के तो देख ।
पावन हो जाही ना कंठ हा तो तोरे,
भाखा ला अपन तैं बोल के तो देख ।।

माटी हमरे गांव के...

माटी हमरे गांव के, महर महर ममहाय ।
चंदन ले आगर लगय, माथा देव चढ़ाय ।।

दाई के कोरा असन, माटी हवय महान ।
अपन गांव के ये मया, मिलय न कहूं जहान
उपजे बाढे हन जिहां, धुररा देह लगाय । माटी हमरे गांव के......

खेेले कूदे हन जिहां, आनी बानी खेल ।
संगी संगी हम रहन, करके सबले मेल ।।
नरवा तरिया के मया, हमला रहय लुभाय ।। माटी हमरे गांव के......

चांव चांव चिरई करय, अपने पाखी खोल ।
हरियर हरियर खार मा, मनुवा नाचय डोल ।।
अमराई बोइर झरी, अपने तीर बलाय।। माटी हमरे गांव के......

कहां मोर लइका हवय, कइसन ओखर हाल ।
कइसे ओ बिसराय हे, मोर हाल बेहाल ।।
गांव तोर सुरता करय, आंखी आंसु ढराय । माटी हमरे गांव के...

शनिवार, 28 नवंबर 2015

गुटका के अइसन चलन

नवा जमाना के चलन, गुटखा पाउच देख।
गली सड़क मा थूक ले, चित्र गढ़े अनलेख ।।

चगल चगल के रात दिन, छेरी कस पगुराय ।
गुटका पाउच खाय के, गली खोर रंगाय ।।

पथरा रंगे थूक ले,घसरे मा ना जाय ।
रंग करेजा मा भरे, अइसन गुटका भाय ।।

पान सुपारी हे कहां, गुटका सबे लमाय ।
फेषन के ये फेर मा, सरहा सरहा खाय ।।

का का के धुररा हवय, काला कोन बताय ।
गुटका के अइसन चलन, सबो बात बिसराय ।।

बुधवार, 25 नवंबर 2015

सहिष्णुता

सहिष्णुता काला कहिथे, पूछय लइका आज ।
कोन जनी गा बेटवा, आवत मोला लाज ।।

प्रश्नउठे ना आज तक, का होगे अब बात ।
हीरो पिक्चर के कहे, समझ नई तो आत ।।

टी.वी. भूकय रात दिन, काखर पइसा पाय ।
सहिष्णुता आय का, कोनो नई बताय ।।

मोला लगथे ये हवे, जइसे हरही गाय ।
हरियर हरियर खेत मा, मनमाफिक तो जाय ।

मोर सोच मा बेटवा, सहिष्णुता हे सोच ।
सोच सोच ले सोच के, माथा कलगी खोच ।।

सागर मा नदिया भरय, घर कुरिया मा गांव ।
सब ला तो एके लगय, बर पीपर के छांव ।।

धरती पानी अउ हवा, सहिष्णुता के मूर्ति ।
जीव जीव हर जीव के, करथे इच्छा पूर्ति ।।

रविवार, 22 नवंबर 2015

कचरा करे सवाल

काबर पैदा होय हॅव, कचरा करे सवाल ।
फेके डारे बर घला, माचे हवय बवाल ।।

घर ले फेके अंगना, लगे अंगना खोर ।
खोर खोर मा हे लगे, कतका कुढ़वा मोर ।।
जतर कतर तो घात हे, गांव शहर के हाल । काबर पैदा होय हॅव....

नाक कान ला मूंद के, जाथें मोला छोड़ ।
अइसन अइसन सोच के, कइसे होही तोड़ ।।
कोन खास अउ आम हे, सबके एके हाल । काबर पैदा होय हॅव...

आये फेषन हे नवा, नेता ले शुरूवात ।
जब तक चमकय केमरा, चमचा संग बरात ।।
झउहा रापा ला धरे, चले अपन ओ चाल । काबर पैदा होय हॅव....

ऐमा का परहेज हे, होय मोर उद्धार ।
साफ सफाई हे करे, भले दिखावा झार ।।
संग होय सबके कहूं, कर लव मोरो ख्याल । काबर पैदा होय हॅव......

गुरुवार, 19 नवंबर 2015

मइल हाथ के होत हे

मइल हाथ के होत हे, तोर चुने सरकार ।
अपन आप ला देख ले, फेर बोल ललकार ।।

देश राज हा तोर हे, खुद ला मालिक जान ।
लोकतंत्र के राज मा, चलय तोर फरमान ।।

अपन आप ला भूल के, गे नेता दरबार ।
लालच मा मतदान के, भोग सजा सौ बार ।।

प्रांतवाद के बात हा, छाये काबर देश ।
काम आय हे वोट बर, मिटे कहां हे क्लेश ।।

तोर रीति संस्कार हा, हे गा तोरे हाथ ।
अपने ला बिसराय के, ठोकत हस अब माथ ।।

हे गुरूनानक देव के

हे गुरूनानक देव के, आज परब परकास ।
अपन हाथ ला जोर के, करत हवंव अरदास ।

ओ तलवंडी गांव मा, बन आये भगवान ।
दाई तृप्ता हा रहिस, ददा रहिस कल्याण ।
सुघ्घर पावन दिन रहिस,कातिक पुन्नी मास । हे गुरूनानक देव के...

रहिस नानपन ले अलग, जगत मोह ले दूर ।
अपने मा खोये रहय, रहय अपन मा चूर ।।
पंडित मौली ले घला, करय प्रष्न ओ खास । हे गुरूनानक देव के...

गुरू नानक के काम मा, चमत्कार ला देख ।
जेने जानय तेन हा, लेवय माथा टेक ।।
करे फेर उपदेष हे, देत अपन आभास । हे गुरूनानक देव के...

गुरूनानक हा हे कहे, ढोंगी दुनिया देख ।
मनखे मनखे एक हे, देवता घला एक ।।
सिक्ख पंथ के नेह ला, रचे हवय जनवास । हे गुरूनानक देव के...

हाइकू मोर देश के

जापानी विधा ।
हाइकू, तांका, चोका ।
देश मा छाये ।।

कोन हे इहां
छंद के पूछईया ।
कोन बताये ।

ये मोर देश
मोर अपने आय
घात सुहाये ।

देश के माटी
पुराना परिपाटी
आज नंदाये ।

नवा लहर
मचाये हे कहर
जुन्ना ला खाये ।

कोन देखे हे
मौसम बदले मा
आने धरती ।

कोनो पेेड मा
नवा पत्ती के आये
नवा जर हे ।

टुकना तोपे
कोन डोकरा राखे
काला ये भाते ।


बुधवार, 18 नवंबर 2015

खोजव खोजव चोर ला......

खोजव खोजव चोर ला, कोने मेर लुकाय ।
करके आघू आन ला, कइसे के भरमाय ।।

दिखथे हमला मोहरा, हवय शकुनि के चाल ।
पै बारा ला देख के, होगे बारा हाल ।।
काट मोहरा फेकथन, लेथे नवा बनाय । खोजव खोजव चोर ला......

कट्टरता के देह के, आतंकवाद नाम ।
जात धरम जानय नही, मारे ले हे काम ।।
सोचे के तो बात हे, कट्टर कोन बनाय । खोजव खोजव चोर ला...

जर मा पानी पाय के, बिरवा बनथे झाड़ ।
काटव जर ला खोज के, बाते लेवव ताड़ ।।
मारव अइसन सोच ला, कट्टर जेन बनाय । खोजव खोजव चोर ला....

सोमवार, 16 नवंबर 2015

चार आंतकी के मारे ले

मनखे होके काबर मनखे, मनखे ला अब मार गिराय ।
जेती देखव तेती बैरी, मार काट के लाश बिछाय ।।

मनखे होके पथरा लागे, अपन करेजा बेचे आय ।
जीयत जागत रोबोट बने, आका के ओ हुकुम बजाय ।।

ओखर मन का सोच भरे हे, अपनो जीवन देत गवाय ।
काबर बाचा माने ओ हा, समझ नही हमला तो आय ।।

चार आदमी मिल के कइसे, दुनिया भर ला नाच नचाय ।
लगथे कोनो तो परदा हे, जेखर पाछू बहुत लुकाय ।।

रसद कहां ले पाथे ओमन, बइठे बइठे जउने खाय ।
बारूद बम्ब कहां ले पाथे, अतका नोट कहां ले आय ।।

कोने हा हमर सुपारी देके, घर बइठे बइठे मुस्काय ।
खोजव संगी अइसन बैरी, आतंकी तो जउन बनाय ।

चार आंतकी के मारे ले, आतंक भला कहां सिराय ।
कब तक डारा काटत रहिबो, जर ला अब खन कोड़ हटाव ।।

शनिवार, 14 नवंबर 2015

राउत दोहा बर-


तुलसी चौरा अंगना, पीपर तरिया पार ।
लहर लहर खेती करय, अइसन गांव हमार ।।

गोबर खातू डार ले, खेती होही पोठ ।
लइका बच्चा मन घला, करही तोरे गोठ ।।

गउचर परिया छोड़ दे, खड़े रहन दे पेड़ ।
चारा चरही ससन भर, गाय पठरू अउ भेड़ ।।

गली खोर अउ अंगना, राखव लीप बहार ।
रहिही चंगा देह हा, होय नही बीमार  ।।

मोटर गाड़ी के धुॅंवा, करय हाल बेहाल ।
रूख राई मन हे कहां, जंगल हे बदहाल ।।

गुरुवार, 12 नवंबर 2015

चिट-पट दूनों संग मा

चिट-पट  दूनों संग मा, सिक्का के दू छोर ।
देवारी के आड़ मा, दिखे जुआ के जोर ।।

डर हे छुछवा होय के, मनखे तन ला पाय ।
लक्ष्मी ला परघाय के, पइसा हार गवाय ।।

कोन नई हे बेवड़ा, जेती देख बिजार।
सुख दुख ह बहाना हवय, रोज लगे बाजार ।।

कहत सुनत तो हे सबो, माने कोने बात ।
सबो बात खुद जानथे, करय तभो खुद घात ।।

मंगलवार, 10 नवंबर 2015

अइसे दीया बार

अपने मन के कोनहा, अइसे दीया बार ।
रिगबिग रिगबिग तो दिखय, तोरे अवगुण झार ।।

अपन कमी ला जान के, काही करव उपाय ।
बाचय मत एको अकन, मन मा तोरे समाय ।।
देवारी दीया हाथ धर, अवगुण ला तैं मार । अपने मन के कोनहा...

हमरे सुधरे मा जगत, सुधरय पक्का जान ।
छोड़ गरब गुमान अपन, छोड़ अपन अभिमान ।।
अपन मया के बंधना, बांधव जी संसार ।। अपने मन के कोनहा...

तोरे कस तो आन हे, सुघ्घर के इंसान ।
ना कोनो छोटे बड़े, ना कोनो हैवान ।।
हवय भुले भटके भले, ओला तैं सम्हार । अपने मन के कोनहा...


जाति पाति अउ पंथ के, कर देबो अब अंत ।
मनखे  हा मनखे रहय, मन से होबो संत ।।
राम राज के कल्पना, करबो हम साकार । अपने मन के कोनहा...

सोमवार, 9 नवंबर 2015

जय जय हे धनवंतरी

जय जय हे धनवंतरी, दव हमला वरदान ।
स्वस्थ रहय तन मन हमर, स्वस्थ रहय सम्मान ।।

धनतेरस के ये परब, आय जनम दिन तोर ।
हाथ जोड़ परनाम हे, विनती सुन ले मोर ।।

भौतिकता के फेर मा, हम तोला बिसराय ।
जड़ी बुटी ला छोड़ के, धन के परब बनाय ।।

हवय घोर गलती हमर, धरत हवन हम कान ।
आसो ले अब हर बरस, करबो तोरे मान ।।

साफ सफाई राखबो, हम अपने घर द्वार ।
रखिहंव हमरे ध्यान तुम, होई मत बीमार ।।

दीया के दरद

माटी दीया हा कहय, काखर मेरा जांव ।
कोनो फटकय ना इहां, काला दरद बतांव ।
 
खाथें मोरे अन्न ला, सोथे मोरे छांव ।
मोरे कोरा छोड़ के, कहां करे हे ठांव ।।

दीया बाती हा हवय, जस पानी मा मीन ।
रिगबिग ले बिजली बरे, फुटे फटाका चीन ।।

पढ़े लिखे लइका इहां, बइठे आलू छील ।
काम करय ना चीन कस, देखत रहिथे झील ।।

दर दर मांगय नौकरी, कागज ला देखाय ।
काम बुता जानय नही, कोने हुनर बताय ।।

स्वाभिमान हा कति सुते, देश प्रेम बिसराय ।
माटी दीया बार लव, अपने मान जगाय ।।


देवारी

चिरई चिरगुन कस चहकय लइका ।
पाके आमा कस गमकय लइका ।
आगे    आगे      देवारी       आगे,
कहि के बिजली कस दमकय लइका ।

खोर अंगना मा रंगोली पुरय लइका ।
ले सखी सहेली देखे बर जुरय लइका ।
रंग रंग के हे रंगोली सुघर अतका,
देख फूल कस भवरा बन घुरय लइका ।।

दीया म बाती ला बोरय लइका ।
बाती म आगी ला जोरय लइका ।।
देवारी के अंजोरे बगरावय,
देखव फटाका ला फोरय लइका ।

खोरे मा जब सिगबिग सिगबिग आगे लइका ।
चंदैनी कस रिगबिग रिगबिग छागे लइका ।
ऐती ओती चारो कोती कूदत नाचत,
मुचमुच हासत सौंहे देवारी लागे लइका ।

रविवार, 8 नवंबर 2015

दू ठन मुक्तक

1
गजल शेर के घला नियम होथे ।
लिखे बोले मा जिहां संयम होथे ।।
रदिफ काफिया बिना जाने कतको
गजलकार के इहां नजम होथे ।

2
मन के पीरा हरय कोन ।
ठउरे ओखर भरय कोन ।।
वो हर चलदिस जगत छोड़ ।
रहि के जींदा मरय कोन ।।


शनिवार, 7 नवंबर 2015

चुप हे ता सब कुछ बने

चुप हे ता सब कुछ बने, मुॅह खोलत बेकार ।
मनखे हिन्दूस्थान के, कबतक रहय गवार ।।

सहत रहिन ता सब बने, जागे मा हे बेकार ।
का काठा अउ का पसर, मुठ्ठी बोलय झार ।।

रहय दूध मा जल मिले, कहां हवय परहेज ।
पानी पानी दूध मा, दूध रहय निस्तेज ।।

ओखर मैना पोसवा, बोलय ओखर गोठ ।
तोर खीर पातर हवय, ओखर नून ह पोठ ।।

करिया कउॅंवा कोइली, दिखथे दूनो एक ।
बिन बोले गा ऊंखरे, काला कहि हम नेक ।।

शुक्रवार, 6 नवंबर 2015

आये देवारी

ले कांदी कचरा, कोनो डबरा, फेकव संगी, बारी ले ।
पैठा अउ चवरा, होवय धवरा, पोतव संगी, दुवारी ले ।।
आये देवारी, सबके दुवारी, साफ सफाई, खोजत हे ।
जिहां साफ सुथरा, पाये बपुरा, ऊंहे सुख ला, बोजत हे ।।

आसो के देवारी

कहां कहां जावंव, कइसे लावंव, तेल फूल अउ, बाती रे ।
देख मंहगाई, कइसन भाई, मोर जरत हे, छाती रे ।।
आसो देवारी, मोरे दुवारी, कइसे आही, अइसन मा ।
टूटे हे फइका, रोवत लइका, जानय मानय, कइसन मा ।।

मंगलवार, 3 नवंबर 2015

तोर मया ला पाय के

नायक-
अपने अचरा छोर मा, बांध मया के डोर।
लहर लहर जब ये करय, धड़कन जागय मोर ।।

नायिका- तोर मया के झूलना, झूलॅंव अंगना खोर ।
सपना आंखी हे बसे, देबे झन तैं टोर ।।
नायक-
फूल असन हाॅसी हवय, कोयल बानी गोठ ।
चंदा बानी मुॅह हवय, मया हवे बड़ पोठ ।।
दरस परय बर तोर मैं, तांकव बने चकोर । अपने अचरा छोर मा...

नायिका- तोर देह के छांव कस, रेंगॅंव संगे संग ।
छाय मया के जब घटा, दूनों एके रंग ।।
मोरे तन मन मा चढ़े, रंग मया के तोर ।। सपना आंखी हे बसे...

नायक-
तोर मोर सपना हवय, जस नदिया अउ कोर ।
छोर बिना नदिया कहां, नदिया बिन ना छोर ।।

नायिका लहर लहर अचरा करय, तोर बांह के छोर ।
तोर मया ला पाय के, होगे मोरे भोर ।।