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कतका झन देखे हें-

पढ़ई लिखई

पढ़ई लिखई सीख के, अपन बदल ले सोच ।
ज्ञान बाह भर समेट के, माथा कलगी खोच ।।
माथा कलगी खोच, दया उपकार अहिंसा ।
तोर मोर ला छोड़, मया कर ले हरहिंछा ।।
मया आय गा नेह, चलव ऐमा घर बनई ।
ऊंच नीच के भेद, मेटथे पढ़ई लिखई ।।

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