पहिली मुरकेटव, इखर टोटा (द्वितीय झूलना दंडक छंद) एक खड़े बाहिर, एक अड़े भीतर, बैरी दूनों हे, देष के गा । बाहिर ले जादा, भीतर के बैरी, बैरी ले बैरी, देष के गा ।। बाहिर ला छोड़व, भीतर ला देखव, पहिली मुरकेटव, इखर टोटा । बाहिर के का हे, भीतर ला देखत, पटाटोर जाही, धरत लोटा ।। -रमेशकुमार सिंह चौहान
रामेश्वर यात्रा
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रामेश्वर यात्रा
रामेश्वर यात्रा — तीर्थों की ओर
श्री शमी गणेश को प्रथम वंदन,
जो हैं नवागढ़ के माथे का चंदन।
रामेश्वर यात्रा का श्रीगणेश,
हमारे सहाय हों...
5 दिन पहले