दुवारी मा चौरा, चौरा म घर चातर होगे साकुर, अब धंधा के मर । मोरे गाँव मा मोरे गाँव मा, देखय कोन गाँव ला । मोरे गाँव मा गली ला छेके, मन भर के लइका खेले नई सकयं, अब बने तन के । मोरे गाँव मा मोरे गाँव मा, देखय कोन गाँव ला । मोरे गाँव मा खेत तीर परिया, परिया तीर खेत खेत खेते हवय, परिया ला तो देख । मोरे गाँव मा मोरे गाँव मा, देखय कोन गाँव ला । मोरे गाँव मा नदिया के पीरा, सुनय अब कोन नदिया के पैरी, काबर होगे मोन । मोरे गाँव मा मोरे गाँव मा, देखय कोन गाँव ला । मोरे गाँव मा बस्ती मा तरिया, तरिया मा बस्ती लइका तउरय कहाँ, अब अपने मस्ती । मोरे गाँव मा मोरे गाँव मा, देखय कोन गाँव ला । मोरे गाँव मा गाय बर चरिया, चरिया बर गाय कोठा होगे सुन्ना, बछरू नई नरियाय । मोरे गाँव मा मोरे गाँव मा, देखय कोन गाँव ला । मोरे गाँव मा -रमेश चौहान
गीत : आज बंधे दो मन एक डोर में
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*मुखड़ा (युगल)*
आज बंधे दो मन एक डोर में
सपनों की उजली भोर में
तुम हाथ पकड़ कर साथ चलो
मैं छाया बन जाऊँ हर मोड़ में
आज बंधे दो मन एक डोर में
*अंतरा 1 (स...
6 घंटे पहले