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कतका झन देखे हें-

आनी बानी गीत गा

आनी बानी गीत गा, बने रहय श्रृंगार  ।
गढ़व शब्द के ओढ़ना, लोक-लाज सम्हार ।।
लोक-लाज सम्हार, परी कस सुघ्घर लागय ।
छत्तीसगढ़ी गीत, देश परदेश म छाजय ।।
गुरतुर लागय गीत, होय जस आमा चानी ।
दू अर्थी बोल, गढ़व मत आनी बानी ।।

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