SURTA ]- छत्तीसगढ़ी भाषा अउ छत्तीसगढ़ के धरोहर ल समर्पित

रमेशकुमार सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ी काव्यांजली:- सुरता rkdevendra.blogspot.com

देवनागरी मा लिखव

जनम भूमि अउ जननी, सरग जइसे ।
जननी भाखा-बोली, नरक कइसे ।।

छत्तीसगढ़ी हिन्दी, लाज मरथे ।
जब अंग्रेजी भाखा, मुड़ी चढ़थे ।।

देवनागरी लिपि के, मान कर लौ ।
तज के रोमन झांसा, मया भर लौ ।।

कबतक सहत गुलामी, हमन रहिबो ।
कबतक दूसर भाखा, हमन कहिबो ।।

देवनागरी मा लिख, हिम्मत करे ।
कठिन कहत रे येला, दिल नइ जरे ।।

दुनिया देवय झासा, कठिन कहिके ।
तहूँ मगन हस येमा, मुड़ी सहिके ।।

-रमेश चौहान
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