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रमेशकुमार सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ी काव्यांजली:- सुरता rkdevendra.blogspot.com

राउत दोहा बर-





तुलसी चौरा अंगना, पीपर तरिया पार ।
लहर लहर खेती करय, अइसन गांव हमार ।।

गोबर खातू डार ले, खेती होही पोठ ।
लइका बच्चा मन घला, करही तोरे गोठ ।।

गउचर परिया छोड़ दे, खड़े रहन दे पेड़ ।
चारा चरही ससन भर, गाय पठरू अउ भेड़ ।।

गली खोर अउ अंगना, राखव लीप बहार ।
रहिही चंगा देह हा, होय नही बीमार  ।।

मोटर गाड़ी के धुॅंवा, करय हाल बेहाल ।
रूख राई मन हे कहां, जंगल हे बदहाल ।।

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1 टिप्पणियाँ:

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Unknown
admin
30 अक्तूबर 2019 को 7:02 am ×

बहुत सुग्घर
नवगढिया

Congrats bro Unknown you got PERTAMAX...! hehehehe...
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