शनिवार, 14 नवंबर 2015

राउत दोहा बर-


तुलसी चौरा अंगना, पीपर तरिया पार ।
लहर लहर खेती करय, अइसन गांव हमार ।।

गोबर खातू डार ले, खेती होही पोठ ।
लइका बच्चा मन घला, करही तोरे गोठ ।।

गउचर परिया छोड़ दे, खड़े रहन दे पेड़ ।
चारा चरही ससन भर, गाय पठरू अउ भेड़ ।।

गली खोर अउ अंगना, राखव लीप बहार ।
रहिही चंगा देह हा, होय नही बीमार  ।।

मोटर गाड़ी के धुॅंवा, करय हाल बेहाल ।
रूख राई मन हे कहां, जंगल हे बदहाल ।।