SURTA ]- छत्तीसगढ़ी भाषा अउ छत्तीसगढ़ के धरोहर ल समर्पित

रमेशकुमार सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ी काव्यांजली:- सुरता rkdevendra.blogspot.com

चिट-पट दूनों संग मा

चिट-पट  दूनों संग मा, सिक्का के दू छोर ।
देवारी के आड़ मा, दिखे जुआ के जोर ।।

डर हे छुछवा होय के, मनखे तन ला पाय ।
लक्ष्मी ला परघाय के, पइसा हार गवाय ।।

कोन नई हे बेवड़ा, जेती देख बिजार।
सुख दुख ह बहाना हवय, रोज लगे बाजार ।।

कहत सुनत तो हे सबो, माने कोने बात ।
सबो बात खुद जानथे, करय तभो खुद घात ।।

Previous
Next Post »

ताते-तात

शिव-शिव शिव अस (डमरू घनाक्षरी)

डमरू घनाक्षरी (32 वर्ण लघु) सुनत-गुनत चुप, सहत-रहत गुप दुख मन न छुवत, दुखित रहय तन । बम-बम हर-हर, शिव चरण गहत, शिव-शिव शिव अस, जग दुख भर मन ...

अउ का-का हे इहाँ-