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कतका झन देखे हें-

संगी चल चल खेत मा

संगी चल  चल खेत मा, बोये बर गा धान ।
राग पाग सुघ्घर लगत, कहत हवंय किसान ।।
कहत हवय किसान, हाथ बइला मा फेरत।
धरे बीजहा धान, दुवारी मा नागर हेरत ।।
भरही कइसे पेट, करे मा आज लफंगी ।
आज कमा के काल, खाय ला पाबो संगी ।।

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