दुनिया के हर चीज ला, पइसा धरे खरीद ।
कहिथे गा धनवान मन, हाथे धरे रसीद ।।
हाथ धरे रसीद, कहे मनखे तक बिकथे ।
नैतिकता ला आज, जगत मा कोने रखथे ।।
सुनलव कहय ‘रमेश‘, मया तो हे बैगुनिया ।
दया मया भगवान, बिके ना कोनो दुनिया ।।
-रमेश चौहान
कहिथे गा धनवान मन, हाथे धरे रसीद ।।
हाथ धरे रसीद, कहे मनखे तक बिकथे ।
नैतिकता ला आज, जगत मा कोने रखथे ।।
सुनलव कहय ‘रमेश‘, मया तो हे बैगुनिया ।
दया मया भगवान, बिके ना कोनो दुनिया ।।
-रमेश चौहान
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