हाथ गोड़ सब मारथे, रखे जिये के चाह ।
चाह करे मा राह हे, ले नदिया के थाह ।।
थाह हार के हे कहां, जब मन जावय हार ।
हार हारथे चाह ले, चाहत मेटय दाह ।।
चाह करे मा राह हे, ले नदिया के थाह ।।
थाह हार के हे कहां, जब मन जावय हार ।
हार हारथे चाह ले, चाहत मेटय दाह ।।
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