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कतका झन देखे हें-

मनखे मनखे बाज

राजनीति के डोर मा, मनखे मन छंदाय ।
मनखे होगे जानवर, मनखेपन नंदाय ।।
जात धरम हा मांस हे, मनखे मनखे बाज ।
आघू पाके मांस ला, चिथ चिथ के सब खाय ।।

-रमेश चौहान

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