SURTA ]- छत्तीसगढ़ी भाषा अउ छत्तीसगढ़ के धरोहर ल समर्पित

रमेशकुमार सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ी काव्यांजली:- सुरता rkdevendra.blogspot.com

गुरू घासी दास बबा

गुरु घासी दास बाबा,  सत के  अलख जगायें ये धाम म  । सत के अलख जगायें ये धाम म ...2 सादा तोर खम्भा बाबा, सादा तोर धजा , सादा तोर धज...
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छत्तीसगढ़ महतारी

हे दाई छत्तीसगढ़, हाथ जोड़ परनाम। घात मयारू तैं हवस, दया मया के धाम । दया मया के धाम, सांति सुख तै बगरावत । धन धन हमर भाग, जिहां तो ...
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चार दिन के सगा घरोधिया होगे

चार दिन के सगा घरोधिया होगे

चार दिन के सगा घरोधिया होगे । मोर घर के मन ह, परबुधिया होगे ।।1।। का जादू करंजस, अइसन होईस रे अपन समझेव, तेन बहुरूपिया होगे ।।2।। को...
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मोर मयारू गणेश

मोर मयारू गणेश दोहा सबले पहिले होय ना, गणपति पूजा तोर । पाँव परत हंँव तोर गा, विनती सुन ले मोर ।। तोर शरण मा आया जे, ले श्रद्धा विश...
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हे गौरी के लाल

बुद्धि के देवइया अऊ पिरा के हरइया हे गज मुख  वाला । सबले पहिली तोला सुमिरव हे षंकर सुत गौरी के लाला ।। वेद पुरान जम्मो तोरे च गुन ल ग...
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खुशी मनाओ भई आज खुशी मनाओं

खुशी मनाओ भई आज खुशी मनाओं

भादो के महीना घटा छाये अंधियारी, बड़ डरावना हे रात कारी कारी । कंस के कारागार बड़ रहिन पहेरेदार, चारो कोती चमुन्दा हे खुल्ला नईये एकोद्...
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धरे कलम गुनत हंव का लिखंव

धरे कलम गुनत हंव का लिखंव लइकामन बर संस्कार के गीत लिखंव, कचरा बिनईया लइकामन के चित्र खिचंव । कोनो कोनो लइका विडि़यो गेम खेलय, कोनो क...
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जय हो दारू

  ऐती ओती चारो कोती एकेच जयकारा हे । जय हो दारू, जय हो दारू, जय हो दारू।। कोनो कहय ये नवा जमाना के चलन हे, त कोनो कोनो कहय ये काम हे श...
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कोशिश करईया मन के कभु हार नई होवय

कोशिश करईया मन के कभु हार नई होवय

                       कोशिश करईया मन के कभु हार नई होवय (श्री हरिवंशराय बच्चन की अमर कृति ‘‘कोशिश करने वालो की हार नही होती‘‘ का अनुवाद) ...
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मोर मईया के जगराता हे

आगे आगे नवरात्रि तिहार, सब मिल के करव जयजय कार । मंदिर मंदिर दाई करत हे बिहार, मोर मईया के जगराता हे । कोनो जलाव जोत मनौती, त कोनो करावय ...
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 -ः मोर छत्तीसगढ के सुघ्घर गांव:ः-

-ः मोर छत्तीसगढ के सुघ्घर गांव:ः-

जिहां चिरई-चिरगुन करे चांव-चांव, जिहां कऊंवा मन करें कांव-कांव । जिहां कोलिहा-कुकुर मन करे हांव-हांव, ऊंहें बस्ते मोर छत्तीसगढ के सुघ्घर...
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हे जगत जननी महामाई

हे जगत जननी महामाई, सदा रहव सहाई । मैं तोर नान्हे नादान लईका, अऊ तही मोर दाई । तोरेच किरपा म ये जिंनगी पाय हव । तोहीच ल अपन मन मंदिर...
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ताते-तात

शिव-शिव शिव अस (डमरू घनाक्षरी)

डमरू घनाक्षरी (32 वर्ण लघु) सुनत-गुनत चुप, सहत-रहत गुप दुख मन न छुवत, दुखित रहय तन । बम-बम हर-हर, शिव चरण गहत, शिव-शिव शिव अस, जग दुख भर मन ...

अउ का-का हे इहाँ-